A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
क्यों ना लिखूं कोई अंदर से परेशा करता है रात और दिन किया करता है छेड़ दी जंग शब्दों से तो तूफा को शोर मचाना था।
(क्रेडिट- मिस्टर जीएसी)
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