A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
ऐ वक्त कभी हाथ आए तो
कस के मुट्ठी में पकड़ लूंगा
अपने हर एक वक्त का का हिसाब जरूर लूंगा
तेरे बाजू में ही मेरा घर था
मेरे सजदे में तू आया था
यह जान के भी मुझसे कतराता था
ऐ वक्त कभी तु हाथ तो आये।
(credit- Mr.Gac )
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