A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
सफर में अकेले होने का गम न था
जो राह में मिले वो भी अकेले ही थे
फिर क्यों मिलने बिछड़ने की याद सताती है एक सफर था जिसकी मंजिल ही सफर थी ।
(credit-Mr.Gac )
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