The Gac Thought's#9

तुझे धिक्कार है ये जिंदगी ना जीती है ना जीने देती है क्या तू चाहती है ये उलझने देती है जो तुझे समझ गया वो संभल गया और जो ना समझा वो बिखर गया।
(credit- Mr.Gac )












                   


                    



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