मुझे बार-बार मंजिल से पहले गिराने में क्यों मजा आता है
कभी रास्तों से पूछ लिया करो उन्हें दर्द कितना होता है
तमाम उम्र का हिसाब है मांग लिया होता
मेरे मुकद्दर को मंजिलों का दीदार ना हुआ
अब वक्त थोड़े हैं यहां से लौटने का
मेरा जिस्म नहीं रुह दीदार करेगी मंजिलों का ।
(Credit- Mr. Gac Storm )
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