A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
कुछ दिनों से फिजा की रंगत बदली
कुछ हम बदलें कुछ तुम बदले
सारे जहां की बे परवाह हिया बदली
बार-बार हाथों को नह लाता हूं
डरता हूं कहीं हाथों की रंगत न बदले
हाथों में खंजर लिए एक गुमनाम सा दुश्मन चारों ओर कत्ल के लिए घूमता है
( credit - Mr Gac)
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