The Gac Thought's #47

 कुछ दिनों से फिजा की रंगत बदली

कुछ हम बदलें कुछ तुम बदले

सारे जहां की बे परवाह हिया बदली

बार-बार हाथों को नह लाता हूं

डरता हूं कहीं हाथों की रंगत न बदले

हाथों में खंजर लिए एक गुमनाम सा दुश्मन चारों ओर कत्ल के लिए घूमता है

            ( credit - Mr Gac)



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