A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
फिर टूटा हूं जुड़ भी जाऊंगा
मैं मातम नहीं मनाता
कह दो खुदाओ से मुझे आजमाना छोड़ दे
हम जो रूठे तो तेरे वजूद का क्या होगा।
(Credit- Mr. Gac Storm )
Comments
Post a Comment