A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
मैं हर बार हार के भी जीता महसूस करता हूं
उजालों में भी अंधेरा करके रहता हूं
मैंने अंधेरों से बहुत कुछ सीखा है
तुमने उजालों से क्या-क्या पाया है।
( Credit- Mr. Gac )
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