A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
जख्म को छुपाने का हुनर जान लो
मरहम ओ की तलाशी सारे जहां में है
दर्द उठने पर अश्कों का सैलाब लाओ
जहां की नदियां अभी सुखी हैं।
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