A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
कोई बात जो दिल को लगी हो निकाल लो
बस्तियां बसने में देर नहीं लगती
गुम हो जाओगे बस्तियों में सदा के लिए
फिर कोई दिल्लगी न होगी।
Comments
Post a Comment