A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
अब सजदे अपना काम नहीं करते
मन्नते न जाने कहां चली गई
वह सुनता नहीं अब हम सुनाएं क्यों
लगता है खुदा भी शरमाया हुआ है
( Credit- Mr. Gac )
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