The Gac Thought's # 112

मैं जितने में था कुछ खुश ही था

तुमने ख्वाबों में खूब घुमाया

खुद का वजूद ही बदल डाला

हर हसरतों को पैदा कर उसे जीना सिखाया

खुद से खुद के वजूद को मिटा डाला

जो अपने थे कहने को थे पर थे अपने

उनसे जुदा होना सिखाया

मैं जब कभी भी खुद को सुनना चाहा

तुम ख्वाबों में आकर भुला दिए

एक नई कहानी गण सुना आये

अब मैं बिल्कुल तन्हा हूं

बेवजह का हारा हूं

वक्त भी मेरा चला गया

मैं तकता रह गया।



    ( Credit- Mr. Gac )



 

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