The Gac Thought's # 113

सुनता हूं सुनाया करो

कुछ आप बीती सुनाया करो

कहानियां अक्सर किताबों में पढी थी 

तुम हकीकत बयां करते हो

कुछ फासले भी मिटाया करो

उनसे मिलने का एक बहाना बनाया करो

राह  में मिल जाए उनसे नजरें चुराया करो

कभी घर जाकर मिल आया करो

आज के दौर में कहां कोई अपना मिलता है

मिल जाय तो खुश हो जाया करो

अभी रात होनी तो बाकी है

रोशनी को क्यों जगाते  हो।

   ( Credit- Mr. Gac )



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