The Gac Thought's # 117
जिंदगी हर रोज एक सवाल करती है
मैं हर रोज हंस के टाल जाता हूं
अंधेरों से नहीं अब तो उजालों से घबरा जाता हूं
कहीं तू और तेरे सवालों का काफिला ना मिल जाए
हर रोज जीने का मकान बदलता हूं
तुझे और जीने की दुआ करता हूं
तुझे बेवक्त मरने न दूंगा यह खुद से वादा करता हूं
ढूंढती रह जाएगी सारे कयानात में
एक सवाल जो जवाब है टाल जाता हूं।



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