A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
कौन हलक में आकर ढूंढता है
धड़कन ए जान जाती हैं
कोई अजनबी तो होगा नहीं
कोई बहुत अपना सा होगा
खयालो ने जब दम तोड़ दिया
तुझे याद करना भी गुनाह है।
( Credit- Mr. Gac )
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