कैद मुझको देखकर शर्मा गई
मेरी हालत पे रोने लगी
कुछ कहने लगी
अपनी रिहाई की तारीख बता
अपनी आजादी की अर्जी लगा
तेरे गुनाह दिखते नहीं
तेरे कोई सवाल होते भी नहीं
बोल मैं रास्ता दिखा दूं
इस कैद को मिटा दूं
मैं आसमां को देखता रहा
वह कुछ समझता गया।
( Credit- Mr. Gac )
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