A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
कौन मेरे खयालों को छेड जाता है
कमबखत अब याद भी तो नहीं आता है
ढूंढता है हमको अक्सर अकेले में
उसे पता नहीं उसकी नादानियां मेरे साथ रहती हैं।
(Credit- Mr. Gac )
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