The Gac Thought's # 126

 कौन मेरे खयालों को छेड जाता है

कमबखत अब याद भी तो नहीं आता है

ढूंढता है हमको अक्सर अकेले में

उसे पता नहीं उसकी नादानियां मेरे साथ रहती हैं।

      (Credit- Mr. Gac )


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