A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
दिलों में नफरतों का जहर घोल रहे हो
शर्म नहीं आती कभी मातमो से पूछा है
अब तुम किसके घर आ रही हो।
( Credit- Mr. Gac )
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