खुद के हालात देख घर की दीवारें चटकने लगी
एक वक्त हो गया नहलाया नहीं था
नए कपड़े पहनाया नहीं था
वक्त बदलने के इंतजार में था
घर की चौखट ए भी अब कुछ आवाज देती है
मैं समझकर हाथों से थपथपा देता था
कुछ बहला देता था
अब वक्त आता ही होगा
खुशखबरी लाता ही होगा।
( Credit- Mr. Gac )
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