The Gac Thought's # 131

खुद के हालात देख घर की दीवारें चटकने लगी

एक वक्त हो गया नहलाया नहीं था

नए कपड़े पहनाया नहीं था

वक्त बदलने के इंतजार में था

घर की चौखट ए भी अब कुछ आवाज देती है

मैं समझकर हाथों से थपथपा देता था

कुछ बहला देता था

अब वक्त आता ही होगा

खुशखबरी लाता ही होगा।

          ( Credit- Mr. Gac )



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