A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
क्यों नहीं कोई भी लिख सकता है
अपने जज्बातों को शब्दों की कश्ती पे चला सकता है
जरूरी नहीं हर कोई तैरना जानता
कुछ काम कश्तियों को भी करना पड़ता है।
(Credit- Mr. Gac )
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