The Gac Thought's # 144


मुझसे पूछे बगैर तेवर बदलती है
परछाई बन के साथ रहती है
अजीब है, पूछता हूं तो खामोश रहती है
हर रोज तुझमें खोजता हूं
एक नई उम्मीद की किरण
तू अंधेरों में सिमट जाती है।
    ( Credit- Mr. Gac )

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