A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
क्यों चुभता हूं तेरी आंखों में
हम तो तेरे रोशनी के आसपास भी नहीं
तेरा खौफ बयां कर देता है
तू अपनों से बहुत डरता है।
( Credit- Mr. Gac )
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