A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
मुश्किलें कम नहीं अब ज्यादा है
कोई खामोश होकर फरियाद करता है
जहन में सवालों के सैलाब है उठते
कई कश्तियां मेरे वजन से डूबी हैं
तूफानों को आने में वक्त नहीं लगता
मेरा दिल बहुत दिनों से दरिया बना है।
( Credit- Mr. Gac )
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