The Gac Thought's #44


ऐ उम्र कोई साज छेड
गुनगुनाने को जी करता है
अबकी सावन हो ना हो भीगने को जी करता है
हम एक नदी के दो छोर हैं
माँ ने हम दोनों को संवारा है।
(credit-MrGac )

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