The Gac Thought's # 50

 ठहर अभी आधी रात बाकी है

मैं अभी जगा नहीं हूं अंधेरा है

मेरे जिस्म में अभी तेरी खुमारी हैं

उठूंगा नहीं तू तो वफा कर

बेवफा भी आने वाली है

उसकी आहट बहुत दूर से आ जाती है

तेरे निशा को छुपाना नहीं पड़ता है

ठहर अभी आधी रात बाकी है

ख्वाब भी पूरा बाकी है।

          ( credit - Mr. Gac  )


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