The Gac Thought's #53



चीखती है घर की दीवारें तेरे जाने के बाद
घर के आंगन के फूल खिलना भूल गए
हर रोज चौखट पर धूप तेरी राह देखते देखते सो जाती है
जर्रे जर्रे में तेरी परछाइयां नजर आती है।
           ( credit - Mr. Gac  )


Comments

Popular Posts