The Gac Thought's # 61

 फलक को छू लेने की जिद यह हमें कहां ले आई

जो था पहले से वह भी चला गया

किस्मत तूने कैसा बदला लिया

अब तो जमी भी खड़ा होने का हक पूछती है

मेरे खड़े होने से जो सहम जाते थे

आज वह सर चढ़कर बोलते हैं

इतनी लों  है मेरी आंखों में दरिया भी ठहर जाए

गर मिला वो तो उससे भी दो हाथ हो जाए।

   ( credit- Mr. Gac )



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