A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
ढूंढता हूं अक्सर तुझे हर एक सवालों में
तेरा वजूद कहीं नजर नहीं आता
न जाने क्यों परेशान कर जाता है
गिर जाता हूं जब अपने बिगड़े हालातों से
ना जाने कौन उठा लेता है
ढूंढता हूं अक्सर तुझे हर एक सवालों में।
(credit- Mr. Gac )
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