A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
मैंने हवाओं से पैगाम भेजा है
मेरी ख्वाहिशों की बारिश करा दो
अब न कोई सजदा होगा तुम्हारा
हो सके तो अपने पास मुझे बुला लो।
( credit- Mr. Gac )
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