The Gac Thought's #65

 मैंने हवाओं से पैगाम भेजा है

मेरी ख्वाहिशों की बारिश करा दो

अब न कोई सजदा होगा तुम्हारा

हो सके तो अपने पास मुझे बुला लो।

         ( credit- Mr. Gac )



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