A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
खुदा मैंने कोई गुनाह भी नहीं किया
मुझे गुनहगारों की तरह सजा क्यों दिया
अब आईना भी मुझसे मेरे वजूद का सबूत मांगता है।
( credit- Mr. Gac )
Comments
Post a Comment