कुछ लम्हों ने खता कर दी
वक्त आज भी गुनाहों के चादर में लिपटा है
सदियों से यह होता है कमजोर को झकझोर दिया जाता है
मंजिलों तक आते-आते पांव कट जाते हैं
कुछ खुशनसीबों को बैसाखियां मिल जाती हैं
कुछ अपने जख्मों के निशान राहों में छोड़ जाते हैं।
( credit- Mr. Gac )
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