The Gac Thought's # 72

 बंद जुबान भी बेबस है अब खुलने को तेरे उम्र का सितम कुछ ज्यादा है

सब्र की भी अपनी उम्र है

वो कब तक इंतजार करें

जो ख्वाब तू ने दिखाए थे

आज वो हकीकत बन गए हैं

अब तेरे वजूद पर शक होता है

ना जाने कैसे लोग जिंदा है।

               ( credit- Mr. Gac )


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