A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
दिल में बैठा अंदर वह हर वक्त आवाज देता है
कोई सुनो सुन कर मुझे बताओ क्या व्यथा सुनाता है
मैं अपनी उलझनों से घीरा हूं कुछ सुनाई नहीं देता
ढूंढता हूं कुछ पर दिखाई नहीं देता। ( credit- Mr. Gac )
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