The Gac Thought's# 74

आज फिर जज्बातों ने पुकारा है ऐ मेरे कलम आज फिर तुझे साथ निभाना है शब्द दुल्हन बन बारात लेकर आई है कह दो रोशनाईयो से तु भी चल आज हलाहल कर खुशी मनानी है आज आसमां भी कागजों के चादर बिछाया है चल जी भर के झुमते है। ( Credit- Mr. Gac )

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