A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
अपने जज्बातों को लिखकर बयां करना एक बहाना है
सफर में कुछ तो है ये बताना भी अच्छा है
होता हूं मायूस जब कभी भी
साझ की गोद में बैठ कर जाते परिंदों को देखता हूं।
( Credit- Mr. Gac )
Comments
Post a Comment