The Gac Thought's # 76

हमने भी वह दौर देखे थे

तुमने भी वह दौर देखे थे

फिर यह रिश्तो में इतने फासले क्यों हैं

कोई जीत के भी जीता है

कोई हार के भी जीता है

इन नजरों में बेरुखियां क्यों है

हमने ऊंचाइयों को कभी सर उठा  के ना देखा

तुम सर जमीन में गड़ा के चलते हो

हम जो गिरेंगे गिर के वहीं रह जाएंगे

तुम्हारा तो पता भी ना चलेगा।

    ( Credit- Mr. Gac )


 

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