शब्द जब जज्बातों से चलते हैं
वो आंधियों की तरह चलते हैं
उसे गूंगे बहरों की भाषा नहीं आती
वह तन्हा ही फिजाओं में उड़ते हैं
कुछ किताबे पढ़ कर खुद को समझदार समझते हो
कभी मायूसियों और तनहाइयों को पढ़ो, तो बात बन जाए
कभी तमाशा बनके औरों की नजरों में जियो
उनकी दुआएं मिलने लगेगी।
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