The Gac Thought's # 82

 अब मेरे अपनों से पता पूछती है

कमबखत तूची बेवफा मेरा घर पूछती है

जब से मैंने अंधेरों को पहरा है दिया

मेरी नींद आंखों को सुकून देती है।

          ( Credit- Mr. Gac  )



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