A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
अब मेरे अपनों से पता पूछती है
कमबखत तूची बेवफा मेरा घर पूछती है
जब से मैंने अंधेरों को पहरा है दिया
मेरी नींद आंखों को सुकून देती है।
( Credit- Mr. Gac )
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