A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
ख्वाहिश पालो मिलने की मगर मिलना नहीं
जुदाई का गम फिर ना सताएगा
दिल को झूठा ही तसल्ली देना
शिकायतों का दौर भी आएगा
तुम झूठा बहाना बनाना ना भूलना।
(Credit- Mr. Gac )
Comments
Post a Comment