The Gac Thought's #89
तू एक पहेली सी लगती है
बहुत उलझी हुई सी लगती है
तुझे सुलझाने की कोई जीद थोड़े की है
फिर अनकही सी क्यों लगती है
एक उम्र का हिसाब मै ना लगाता
अगर तू मुझे बहलाने ना लगती
ख्वाहिशें अब बहुत कुछ है करके गुजरने की
मगर तू मुस्कुराने में लगी है
तुझे सवारने की चाहत किस किस को न हो
तू हमेशा दूतकारने में लगी है।
( Credit- Mr. Gac )


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