A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
उड़ ले जी भर जहां में
करले मनमानियां जहां में
तेरे हर ज़ुल्म का निशान जरूर होगा फिजाओं में
वक्त बदलते ठहरते सब आसान हैं
खामोशियों के शोर से तू हवा में बह जाएगा
तेरे गुनाहों ने दस्तखत लगा दी है
हर सीने में तुझे जलाने की आग है।
(Credit- Mr. Gac )
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