जी में आता है जी भर के जिऊं
पर क्या कहूं कल रात मौत मुझे सम्मन दे गई
बाकी उम्र का हिस्सा अभी जी लेंगे
उसके आने तक जी भर के पी लेंगे
है ख्वाहिश अपने यारों से कहने की
मेरे चिताओं की आग से
अंधेरी बस्तियों में उजाला करना
वक्त मिले कभी तो उनके घर जाकर
उनके साथ सूखी रोटियां खाना।
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