खुद को संभाल पाना बड़ा मुश्किल सा लगता है
तमाम राते हमने तुझे आंखों में संभाला है
हद कर दी तुमने मेरे घर में आने की
हर रोज चौखट से पूछता हूं
तेरे पैरों के निशान उसके माथे पर तो नहीं
घर की खिड़कियां भी झूठा दिलासा देती हैं
हवाओं का साथ मिलने पर गुनगुनाती है ।
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