The Gac Thought's # 97

तेरी खातिर कहां-कहां से ना गुजरा

दुश्मन की चौखट से होकर भी गुजरा

तू जिसके घर में रहती है

उसको हमने लतिया के है छोड़ा

तेरी कद्र वह न करेंगे हर गुनाहों में तुझे मिला लेंगे

बेबस लाचार ओके आंसू भी तुझे माफ ना कर पाएंगे

        ( Credit- Mr. Gac )








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