A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
तेरी खातिर कहां-कहां से ना गुजरा
दुश्मन की चौखट से होकर भी गुजरा
तू जिसके घर में रहती है
उसको हमने लतिया के है छोड़ा
तेरी कद्र वह न करेंगे हर गुनाहों में तुझे मिला लेंगे
बेबस लाचार ओके आंसू भी तुझे माफ ना कर पाएंगे
( Credit- Mr. Gac )
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