A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
कुछ पर्दे हैं इन्हें उठाना मत नंगा हो जाऊंगा कुछ दर्द भरे जख्म है जिंदा हो जाऊंगा
गर् मिलने की तबीयत हो अंधेरे में आना बस यह इल्तजा है मरहम ना लाना ।
(credit-Mr.Gac )
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