A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
रात ख्वाबों में कोई आया था कोई जाना पहचाना सा था एक सर्द हवा के झोंकों ने मुझे नींद से जगाया था
मेरे ख्वाबों को अपनी जुल्फों से निकलने की इजाजत दो तमाम उम्र अभी बाकी है।
(credit-Mr.Gac )
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