A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
तुझको देखता हूं
तो खुद को भूल जाता हूं
अय मेरी जान मैं तुझको कितना चाहता हूं
कभी पास आओ तुझे चूमना चाहता हूं
यह दौर कभी खत्म न हो दुआ चाहता हूं
बंदिशों से मैं आजाद होना चाहता हूं।
उम्र की हदों से पार होना चाहता हूं।
( credit-MrGac )
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