The Gac Thoughts's#42

जेहन में एक रोशनी है सदियों से
जिसकी परछाई कहीं दूर तलक दिखती नहीं
अंदर बैठा कोई कहता है
तेरा वजूद जर्रे जर्रे में समाया है।
(credit-MrGac)

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