The Gac Thought's # 155

तुमने आग लगाई ही क्यो अब बुझाने की जिद किए बैठे हो
घर किसी का जला और धुंआ तुम्हारे घर उठा
यू परछाइयों में अपना अक्स नहीं ढूंढते
ये तुम्हारा जिस्म भी एक दिन परछाई बन जाएगा।
        ( Credit- Mr. Gac )



Comments

Popular Posts