A human thought on Life ़़ं़़़़ं़़़ं़़़़ं़़़़ं़़़़़ं़़ं़़़़ं़़़़ं़़़ं़़
ये नशा दौलत का है जनाब
जो चढ़ के भी चढे जाता है
पांव को जमी नहीं आसमा दिखता है।
(Credit- Mr. Gac)
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